Rahat Indori Shayari Collection~Thenewshayari


दोस्तों, अगर किसी को कविता,शायरी पसंद है, तो डॉ राहत इंदौरी साहब को जानता ही होगा, क्योंकि राहत इंदोरी साहब ने शायरी और ग़ज़ल की दुनिया में इतना नाम कमाया है। डॉ राहत इंदोरी जी उर्दू दुनिया के महान कवियों में से एक हैं, इसके अलावा, वे हिंदी दुनिया के अग्रणी गीतकारों में से एक हैं, उनका जन्म 1 जनवरी 1950 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। 

उनके पिता का नाम रफतुल्लाह कुरैशी और माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था। उन्होंने मध्य प्रदेश के भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। आज हम डॉ राहत इंदौरी साहब की कुछ गज़ले और शायरी आपके सामने पेश करने जा रहे है। अगर कुछ गुस्ताखी हो जाए तो मुआफ़ कर दीजिये गा।

Rahat Indori Shayari Collection

Ab Na Main Hun....

अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,
ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।


Ab Na Main Hun, Na Baaki Hai Zamane Mere,
Fir Bhi MashHoor Hain Shaharon Mein Fasane Mere,
Zindagi Hai Toh Naye Zakhm Bhi Lag Jayenge,
Ab Bhi Baaki Hain Kayi Dost Puraane Mere.



Roj Pathar Ki Himayat...

रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं,
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है...



Roj Pathar Ki Himayat Me Gazal Likhte Hai,
Roj Shishe Se Koi Kaam Nikal Padta Hai...

अजनबी ख़्वाहिशें, सीने में दबा भी न सकूँ |
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे
, कि उड़ा भी न सकूँ ||

Ajnabi Khawaishe, Seene Me Daba Bhi N Saku,
Aese Ziddi Hai Parinday, Ki Uda Bhi N Saku...


Maine Apni Khushk....

मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए।


Maine Apni Khushk Ankho Se Lahu Chhalka Diya,
Ek Samander Kah Rah Tha Mujhko Pani Chahiye....


लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,
पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,
उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।


Luu Bhi Chalti Thi Toh Baad-e-Shaba Kehte The,
Paanv Failaye Andheron Ko Diya Kehte The,
Unka Anjaam Tujhe Yaad Nahi Hai Shayad,
Aur Bhi Log The Jo Khud Ko Khuda Kehte The.

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर,
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ.....

Bahut Gurur Hai Dariya Ko Apne Hone Par,
Jo Meri Pyaas Se Uljhe Toh Dhajjiya Udd Jaaye....

Haath Khali Hain Tere.....

हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,

उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।

Haath Khali Hain Tere Shahar Se Jate Jate,
Jaan Hoti Toh Meri Jaan Lutate Jate,
Ab Toh Har Haath Ka Patthar Humein Pehchanta Hai,
Umr Gujri Hai Tere Shahar Mein Aate Jate.

आँख में पानी रखो, होंटों पे चिंगारी रखो |
ज़िंदा रहना है तो, तरकीबें बहुत सारी रखो ||

Aankh Main Paani Rakho, Hotho Pe Chingari Rakho,
Zinda Rahna Hai Toh, Tarkibe Bahut Rakho....



Naye Kirdaar Aate....

नए किरदार आते जा रहे हैं,
मगर नाटक पुराना चल रहा है। 

Naye Kirdaar Aate Ja Rahe Hai,
Magar Natak Purana Chal Raha Hai....



Chehron Ke Liye....

चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं,
इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं,​
महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश​,
जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है।


Chehron Ke Liye Aayine Kurbaan Kiye Hain,
Iss Shauk Mein Apne Bade Nuksaan Kiye Hain,
Mehfil Mein Mujhe Gaaliyan Dekar Hai Bahut Khush,
Jis Shakhs Par Maine Bade Ehsaan Kiye Hain.

रोज़ तारों को नुमाइश में , खलल पड़ता हैं |
चाँद पागल हैं , अंधेरे में निकल पड़ता हैं ||

उसकी याद आई हैं , साँसों ज़रा धीरे चलो |
धड़कनो से भी इबादत में , खलल पड़ता हैं ||

Roj Taaro Ko Numaish Me, Khalal Padta Hai,
Chaand Pagal Hai, Andhere Me Nikal Padta Hai,
Uski Yaad Aai Hai, Saanso Jara Dhere Chalo,
Dhadkno Se Bhi Ibadat Main, Khalal Padta Hai....


Main Aakhir Konsa Mousam....

मैं आख़िर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,
यहाँ हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी थी....


Main Aakhir Konsa Mousam Tumhare Naam Kar Deta,
Yaha Har Ek Mousam Ko Guzar Jaane Ki Jadli Thi...

Teri Har Baat Mohabbat....

​तेरी हर बात ​मोहब्बत में गँवारा करके​,
​दिल के बाज़ार में बैठे हैं खसारा करके​,
​मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भंवर है जिसकी​,​​
​तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।


Teri Har Baat Mohabbat Mein Ganwara Karke,
Dil Ke Bajaar Mein Baithe Hain Khasaara Karke,
Main Woh Dariya Hun Ke Har Boond Bhanwar Hai Jiski,
Tumne Achha Hi Kiya Hai Mujhse Kinaara Karke....

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